यूपी में कांग्रेस का सियासी सफर हो रहा खत्म, विधान परिषद में अब कांग्रेस का एक भी सदस्य नहीं

साल 2014 के बाद जब से पूरे देश में भारतीय जनता पार्टी का शासन आया है तब से देश की सबसे पुरानी पार्टी भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस धीरे-धीरे एक-एक राज्य में सिमट की जा रही है। इस बार उत्तर प्रदेश से कांग्रेस के लिए बहुत ही बुरी खबर सामने आई है। बताएं देखी उत्तर प्रदेश विधान परिषद में अब कांग्रेस का एक भी सदस्य नहीं रह जाएगा। बीते इतने साल में कांग्रेस के पूरे करियर में यह पहला ऐसा मौका होगा जब उत्तर प्रदेश विधान परिषद में कांग्रेस का एक भी विधायक नहीं रहेगा। बता दे कि बुधवार के दिन विधान परिषद में कांग्रेस के एकमात्र सदस्य दीपक सिंह रिटायर हो रहे हैं। दीपक सिंह के बाद अब उत्तर प्रदेश विधान परिषद में कांग्रेस का एक भी सदस्य नहीं रहेगा।

यूपी विधान परिषद से कांग्रेस का सूपड़ा साफ

बता दे कि कांग्रेस का उत्तर प्रदेश कोटा से एक भी सांसद राज्यसभा में भी मौजूद नहीं है। इसके बाद अब उत्तर प्रदेश की विधान परिषद में कांग्रेस का यह हाल उत्तर प्रदेश विधान परिषद के गठन के बाद पहली बार हो रहा है। हालांकि बुरी खबर सिर्फ कांग्रेस के लिए ही नहीं बल्कि समाजवादी पार्टी और बहुजन समाज पार्टी के लिए भी है। बहुजन समाजवादी पार्टी का भी अब उत्तर प्रदेश विधान परिषद में एक ही सदस्य रह जाएगा। वहीं समाजवादी पार्टी के लिए बुरी खबर यह है कि उत्तर प्रदेश विधान परिषद से अब समाजवादी पार्टी के पास से नेता प्रतिपक्ष का पद भी छीना जा सकता है।

9 सदस्य हो रहे रिटायर

बुधवार के दिन उत्तर प्रदेश की विधानसभा में से 9 सदस्य रिटायर होने जा रहे हैं। इन 9 सदस्यों में 6 सदस्य समाजवादी पार्टी के हैं। तीन सदस्य बहुजन समाज पार्टी के हैं। एक सदस्य कांग्रेस का और 2 सदस्य भारतीय जनता पार्टी के हैं। हालांकि भारतीय जनता पार्टी के दोनों भी सदस्य पुनः एक बार विधान परिषद के लिए चुने जा चुके हैं जिनमें उत्तर प्रदेश के डिप्टी चीफ मिनिस्टर केशव प्रसाद मौर्य और भूपेंद्र सिंह चौधरी शामिल है। उत्तर प्रदेश के विधान परिषद में से कांग्रेस का सूपड़ा पूरी तरह से साफ हो गया है इसलिए अब उत्तर प्रदेश में कांग्रेस के कार्यकर्ता सीधे तौर पर कांग्रेस आलाकमान पर निशाना साध रहे हैं।

क्या प्रियंका गांधी है जिम्मेदार?

आपकी जानकारी के लिए बता दें कि कांग्रेस की इस करारी हार के लिए लोग प्रियंका गांधी को जिम्मेदार मान रहे हैं। साल 2019 में जिस तरह से कांग्रेस ने लोकसभा चुनाव में उत्तर प्रदेश में करारी हार का सामना किया है उसके बाद लगातार कांग्रेस की हार का सिलसिला जारी है। अमेठी से राहुल गांधी की भी हार गई थी। अमेठी को कांग्रेस का गढ़ माना जाता था। इसके बाद अब साल 2022 में हुए विधानसभा चुनाव में कांग्रेस सिर्फ दो ही विधायक जीता कर ला सकी है। ऐसे में अब राज्यसभा में कांग्रेस का उत्तर प्रदेश कोटा से कोई भी प्रतिनिधित्व करने वाला सदस्य नहीं है। इसके बाद राज्य विधान परिषद से भी कांग्रेस पूरी तरह से गायब हो चुकी है।

Leave a Comment